Monday, January 16, 2012

महाकाल

महाकाल
हे महाकाल, आज वर्ष का पहिला दिन है हम चाहते हैं की वर्ष का यह प्रारम्भ सारे संसार के लिए मुबारिक हो हम सब लोग इस तरह शुभ संकल्प करें कि यह वर्ष स्वपर कल्याण के मार्ग में प्रगतिशील हो
हे प्रभु, तेरे लिए वर्ष क्या, और युग क्या ? तेरे सामने इनकी कोई गिनती नहीं पर हम लोग तेरे इस तुच्छ रूप को ही देख पाते हैं, महान भूत और महान भविष्य का ठीक ठीक विचार नहीं कर पाते पर यही विशाल रूप तो मानवता की आशा है वर्तमान की निष्फलता भविष्य की महान सफलता का बीज हो सकती है, वर्तमान की तपस्या भविष्यके महान आनन्द का कारण बन सकती है, वर्तमान का यह वैभव, अधिकार, प्रतिष्टा, नाम, भविष्य में एक हल्का भी निशान न छोड़े, या अनन्त कष्ट दे यह हो सकता है, ये सब बातें तेरे विशाल रूप के दर्शन से ही समझी जा सकती है भूतकाल ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है पर मनुष्य न भूतकाल से शिक्षण ले पाता है, न भविष्य का विचार कर पाता है, इस प्रकार तेरा दर्शन नहीं कर पाता
हे प्रभु, आज वर्ष का प्रथम दिन मैं तेरा दर्शन करते रहने का संकल्प करता हूँ इससे मैं पुराने अनुभवों से लाभ ले सकूँगा और दूरदर्शी बन सकूँगा, भलाई बुराई का कार्य कारण भाव समझ सकूँगा वर्तमान प्रलोभन ठुकरा सकूँगा और तेरी आशा से कष्टों पर विजय पासकूँगा
स्वामी सत्यभक्त

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