Wednesday, January 25, 2012

पड़ौसी
निकट कुटुम्बी तुल्य हैं, सभ्य पड़ौसी लोग मिल जुल कर करते सदा, सीमित सुख दुःख भोग
सत्येश्वर
तेरा आदेश है कि पडौसियों के साथ कौटुम्बिकता का तथा एक सामाजिकता का सदा परिचय दिया
जाय कुटुम्बी और रिश्तेदार सदा पास नहीं रहते आकस्मिक संकट तथा दिन रात के सहयोग में पडौसी जितने काम आ सकता है, उतना दूसरा नहीं आ सकता; इसलिए पडौसियों को निकट कुटुम्बिय़ो की तरह रहना चाहिए ; परन्तु तूने इस बात की चेतावनी दी है कि एक दूसरे से अनुचित लाभ उठाने की कोशिश न की जाय, न पड़ौसी को किसी तरह परेशान किया जाय इसके लिए तूने निम्नलिखित आदेश दिए हैं :-
1 पडौसियों से उधार क़ा देनलेन मत करो
2 कोई चीज़ उधार ली हो तो समय पर वापिस करो और ज्यों की त्यों वापिस करो साफ करके वापिस करो वापिस करने की लिए तुम स्वयं उसके यहाँ जाओ

3 जहाँ तक बन सके, खाने पीने की सामग्री उधार मत लो, क्योंकि जैसी चीज़ ली है वैसी वापिस करने की सम्भावना बहुत कम रहती है इससे मनोमालिन्य बढता है
4. पड़ौसी के यहाँ भोजन करने के समय मत पहुँचो यदि ऐसे समय पहुँच ही गये हो तो अनुरोध करने पर भी भोजन मत करो
5 अपने बच्चों को सम्हालकर रक्खो वे पड़ौसी के यहाँ उपद्रव न मचायें या उनका कोई नुकसान न कर दें नुकसान हो जाय तो पड़ौसी के बिना कहे या उनके द्वारा मन करने पर भी क्षति पूर्ती जरूर करो
6 रात को सोने के समय, साधारणतः दस से पांच तक ऐसा शोर न मचाओ कि पड़ौसी की नींद हराम हो जाये
7 पड़ौसी के यहाँ मृत्यु आदि होने पर अपने यहाँ आनंदोत्सव न मनाओ
सभ्य पड़ौसी बनने के लिए जो तूने ये सात सूत्र बता दिए हैं, उनका पालन हर पड़ौसी करे ऐसी कृपा कर
सत्यभक्त

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